CPR in Hindi

CPR in Hindi:सीपीआर क्या है और यह कैसे देते हैं?सम्पूर्ण जानकारी

सीपीआर क्या होता है:What is CPR-CPR in Hindi

  • CPR का फ़ुल फ़ॉर्म  कार्डीओ पल्मनेरी रेससिटेशन (Cardio Pulmonary Resuscitation) होता है। यह किसी रोगी या घायल इंसान को दिया जाता है।-CPR in Hindi
  • इसे सही देना सीखना चाहिए, पर सीखने के बाद भी कुछ लोग इसे समय आने पर ठीक से दे नहीं पाते। तो उसे याद रखना ज़रूरी होता है।
  • तो आइए इस लेख में हम जानते हैं सी पी आर की और जानकारी विस्तार से।
  • जब भी कोई इंसान बेहोश होता है, हमारी पूरी कोशिश होनी चाहिए, उसे ज़िंदा करवाने की। बेहोश होने के कयी कारण हो सकते हैं, जैसे की आग लगना, ऊँचाई से गिर जाना, बिजली लगना और सबसे ज़रूरी होता है कार्डीऐक अरेस्ट या दिल का दौरा पड़ना।
  • इसे संजीवनी क्रिया भी कहा जाता हैं।

सीपीआर कब देना चाहिए:When should CPR be given

दिल का दौरा या कार्डीऐक अरेस्ट में:CPR in heart attack

जब दिल का दौरा पढ़ता है, तो पहले घंटे को गोल्डन हूर कहा जाता है। इस समय में जीवन को बचाने की कोशिश की जा सकती है। गोल्डन हावर में  हर आधे घंटे में जीने की आशा दस प्रतिशत कम हो जाती है, तो हमें जल्दी काम करना पड़ता है।-CPR in Hindi

सबसे पहले, आपको घबराना नहीं है और धैर्य रखना है। सबसे पहले आप किसी डॉक्टर या ऐम्ब्युलन्स की माँग करें की आपके सामने एक दिल का दौरे का केस हुआ है। कयी बार ऐम्ब्युलन्स को आने में देर हो सकती है। ऐसी स्थिति में लोगों को पता नहीं होता की CPR कैसे दिया जाता है।

आपको इस समय में धैर्य रखना है और जीवन बचाना है। सबसे पहली बात, आप मरीज़ को रिलाक्ष कराएँ। उसके तंग कपड़े ढीले  कराएँ, जिससे कि वो साँस ले सके। इसका मतलब है की आपको विस्तार से उसके सारे बटन खोलने है, जिससे कि वह साँस ले सकें।

इससे उसे ‘फ़्रेश-ऐर’ मिलेगी, जिससे उसमें ज़िंदगी वापस मिलने की आशंका होगी।

अगर वह होश में है और वह मरीज़ पहले से ही हार्ट अटैक की कोई दवा लेता है, तो उसे वो दवा खिलाएँ।

अगर वह होश में नहीं है तो उसे ज़मीन पर सीधा लेटाएँ। पहले उसकी साँस सुनकर चेक करें। अगर वह साँस ले रहे हैं तो उनके दिल की धड़कन की जाँच करें।

अगर दिल की धड़कन बंद हो गयी हैं तो उनको CPR देना शुरू करें।

बिजली का झटका या किसी भी बेहोशी में:CPR in Electric shock or any fainting

  • आपको इस समय में धैर्य रखना है और जीवन बचाना है। सबसे पहली बात, आप मरीज़ को रिलाक्ष कराएँ। उसके तंग कपड़े ढीले  कराएँ, जिससे कि वो साँस ले सके। इसका मतलब है की आपको विस्तार से उसके सारे बटन खोलने है, जिससे कि वह साँस ले सकें।
  • इससे उसे ‘फ़्रेश-ऐर’ मिलेगी, जिससे उसमें ज़िंदगी वापस मिलने की आशंका होगी।
  • आप को पहले यह देखने है की वो होश में है या नहीं। अगर वह होश में नहीं है तो उसे ज़मीन पर सीधा लेटाएँ। पहले उसकी साँस सुनकर चेक करें। अगर वह साँस ले रहे हैं तो उनके दिल की धड़कन की जाँच करें।
  • अगर दिल की धड़कन बंद हो गयी हैं तो उनको CPR देना शुरू करें।

सीपीआर किस प्रकार देना चाहिए:How to Give CPR- CPR in Hindi

CPR एक ऐसी क्रिया है, जिसे देने के दो मुख्य तरीक़े  होते हैं। यह रही वो क्रियाएँ या तरीक़े :

मुँह से साँस देना : Mouth breathing in cpr
  • अगर मरीज़ को साँस नहीं मिलती, तो उसका मस्तिष्क और हृदय काम करना बंद कर सकते हैं। उसके लिए हमें ये क्रिया करनी पद सकती है:
  • मरीज़ के नाक को अपनी दो उँगलियों से बंद करें और उसके मुँह में साँस फूंके। जब हवा मुँह से जाती है तो वह सीधा फेफड़ों तक जाती है।
  • एक लम्बी साँस लें, और अपने मुँह को मरीज़ के मुँह से चिपकाएँ धीरे-धीरे साँस छोड़ें, जो कि उसके फेफड़ों तक साँस जाए।
  • इस प्रक्रिया के लगातार करने से फेफड़ों में हवा भरेगी ही और साँस वापस शुरु हो सकेगी।
  • जब आप यह साँस दे रहे हों, तो ध्यान दीजिए की मरीज़ की छाती ऊपर-नीचे हो रही है की नहीं।
  • जैसे ही मरीज़ में जान वापस आएगी, तो वो कूद के साँस लेने लगेगा। ऐसा होते ही आप साँस देना बंद कर दें।
छाती को दबाना: Chest clamp
  • मरीज़ को किसी ठोस सतह पर पहले लेटाएँ। ध्यान दें की आप उस मरीज़ को ऐसी जगह रखें जहाँ धुआँ जैसी चीज़ ना हो। उसके आस पास लोगों की भीड़ भी ना हो, इससे मरीज़ को साँस लेने में दिक्कत हो सकती है।
  • उनके बग़ल में अपने घुटनों पर बैठ जाएँ।
  • स्वसनलिका बेहोश हालत में सिकुड़ जाती है, इसीलिए, पहले उनके नाक और गला ज़रूर चेक कर लें, उसमें कुछ फँसा तो नहीं है।
  • फिर हम ध्यान दें की हम तीन चीज़ें सबसे पहले साफ़ करें। वो तीन चीज़ें होती हैं, A, B और C।।।यह एक फ़ॉर्म्युला होता है, CPR से पहले चेक करने का। वह फ़ॉर्म्युला ऐसा होता है:
  • A- ऐरवे, यानी की हम सबसे पहले साफ़ करेंगे हवा के रास्ते को। यह मुँह, नाक और गले से गुज़रती हुयी स्वासनली को साफ़ करना होता है। एक बात का ध्यान दें की उनकी दाढ़ी ऊपर हो जिससे की स्वास नली सीधी हो जाए।
  • B – ब्रीथिंग, यानी को कान लगाकर सन्न है की मरीज़ साँस ले रहा है की नहीं। जब आपको पक्का पता चल जाए की वो साँस नहीं ले रहा, तब आप अगला स्टेप लीजिए।
  • C- करकीयक, यानी की यह चेक करना की उसके दिल की धड़कन चल रही है की नहीं। आप उसके छाती को छो सकते हैं, या उसकी नैब्ज़ से ये जाँच कर सकते है। अगर यह भी बंध है, तो आप CPR शुरू करेंगे।
  • अपने दोनो हाथों को एकदम सीधा रखे, कोनियों से भी और अपनी उँगलियों को बाँध लें। वह मरीज़ के सीने के बीचोबेच पम्प करना शुरू करें।
  • यदि पम्पिंग करते समय साँस आने लगती है, तो पम्पिंग के साथ, मुँह से साँस देने की भी कोशिश करें।
  • ऐसा पम्प आपको प्रति मिनट में सौ बार करना होगा।
  • जब आप तीस बार दबाएँ तो दो बार, सांसें दे।
  • इससे छाती पर दबाने का और मुँह से साँस देने का राशन ३०:०२ हो जाएगा। यही सही तरीक़ा है।

सीपीआर को देते समय क्या ना करें? -What not to do while giving CPR-CPR in Hindi

  • मरीज़ को बिलकुल अकेले ना छोड़ें।
  • नियमित दवाई के अलावा कोई और दवाई ना खिलाएँ।
  • समय बर्बाद ना करें।

सीपीआर देते समय लोगों की आम ग़लतियाँ यह होती हैं:Common mistakes people make while giving CPR are

  • वह समय रहते डॉक्टर या ऐम्ब्युलन्स को सूचित नहीं करते हैं।
  • वह छाती को पम्प करने की टेन्शन में, ‘माउथ तो माउथ’ या मुँह से साँस देना भूल जाते हैं।
  • छाती को पम्प करने की रफ़्तार या तो डर से बहोत धीरे या बहोत तेज़ होती है। सही डर है एक सौ प्रति मिनट।
  • उँगलियों की को ग़लत तरीक़े से रखते हैं, जिससे कि सही छाती पर सही दबाव नहीं पड़ता है
  • छाती पर CPR देते समय हाथ कोनियों से सीधे नहीं होते। यदि वो सीधे नहीं होते, तो आपके शरीर का सही दबाव मरीज़ के छाती पर नहीं पड़ता।
  • उँगलियों को ऐसे ग़लत फँसा देना, की मरीज़ के छाती से सीधा सम्पर्क नहीं बन पाता है। इससे सही दबाव नहीं पड़ता है। 
  • CPR देने वाला सही तरीक़े से घुटनों के बल नहीं बैठता है। यदि इसमें छोटी सी भी चूक हो, तो उसके पूरे वज़न का दबाव मरीज़ के छाती पर नहीं पड़ता है, और CPR ग़लत होता है। इससे कयी जानें बच नहीं पाते हैं।

सीपीआर ट्रेनिंग :CPR Training

अगर किसी को CPR ट्रेनिंग सही मिल पाती  है, तो वक़्त आते ही  वो सिर्फ़ अपने दोस्तों या माता-पिता की ही नहीं, बल्कि कयी अजंबियों की भी भी जान बचा पाता है।

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मेरा नाम रूचि सिंह चौहान है ‌‌‌मुझे लिखना बहुत ज्यादा अच्छा लगता है । मैं लिखने के लिए बहुत पागल हूं ।और लिखती ही रहती हूं । क्योकि मुझे लिखने के अलावा कुछ भी अच्छा नहीं लगता है में बिना किसी बोरियत को महसूस करे लिखते रहती हूँ । मैं 10+ साल से लिखने की फिल्ड मे हूं ।‌‌‌आप मुझसे निम्न ई-मेल पर संपर्क कर सकते हैं। vedupchar01@gmail.com
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