Uterine Cancer in hindi

Uterine Cancer in hindi:गर्भाशय कैंसर क्या हैं?लक्षण,कारण,उपाय

गर्भाशय कैंसर क्या हैं (What is Uterine or Endometrial Cancer)

गर्भाशय में होने वाले कैंसर(Uterine Cancer in hindi) को गर्भाशय कैंसर या बच्चेदानी का कैंसर भी कहा जाता हैं, दरअसल जब गर्भाशय में मौजूद आंतरिक कोशिकाएं जरूरत से ज्यादा बढ़ती हैं तो ऐसी स्थिति में गर्भाशय कैंसर होता हैं। वास्तव में इसका आकर एक नाशपाती की तरह ही होता हैं, महिलाओं के गर्भ के इसी भाग में बच्चें जन्म लेने से पहले का समय बिताते हैं। गर्भाशय दो हिस्सों में बटा होता हैं पहला भाग ग्रीवा और दूसरा भाग कार्पस होता हैं। 

गर्भाशय का निचला भाग जिसे ग्रीवा कहते हैं और यह योनि में खुलता हैं, जबकि कार्पस गर्भाशय का ऊपरी हिस्सा होता हैं। हालांकि ग्रीवा भाग भी गर्भाशय का हिस्सा होता है लेकिन गर्भाशय कैंसर कार्पस भाग में ही होता है। इस कैंसर के होने में अभी तक कोई स्पष्ट कारण नही बताया जा सका हैं लेकिन चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार एस्ट्रोजन का उच्च स्तर पर होना इस कैंसर के होने की वजह हो सकता है। गर्भाशय कैंसर के अधिकतर मामलों में महिलाओं का इलाज शल्य चिकित्सा यानी सर्जरी के द्वारा ही किया जाता है। 

गर्भाशय कैंसर के प्रकार (Types of Uterine Cancer in hindi)

मुख्य रूप से गर्भाशय कैंसर के दो प्रकार होते हैं गर्भाशय सार्कोमा (Uterine Sarcomas) और एंडोमेट्रियल कार्सिनोमा (Endometrial Carcinoma)

गर्भाशय सार्कोमा- इस तरह का गर्भाशय कैंसर गर्भाशय मे मौजूद मांशपेशियों की परत में या संयोजी ऊतकों में होता हैं।

एंडोमेट्रियल कार्सिनोमा- इस तरह का कैंसर गर्भाशय के भीतर की परत में होता हैं। जब इस कैंसर की कोशिकाओं को सूक्ष्मदर्शी के द्वारा देखा जाता हैं तो इस गर्भाशय के कैंसर को कुछ भागों में विभाजित किया जाता है। 

  • एडिनोकार्सिनोमा- यह एंडोमेट्रियल कार्सिनोमा प्रकार के कैंसर की जांच में मुख्य रूप से पाया जाता हैं।
  • स्मॉल सेल कार्सिनोमा
  • ट्रांसिशनल कार्सिनोमा
  • कार्सिनोसार्कोमा
  • स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा- यह फेफड़ों, त्वचा, मूत्राशय, प्रोस्टेट, होंठ, मुंह, योनि, गर्भाशय ग्रीवा समेत विभिन्न अंगों में होता हैं।
  • अविभाजित कार्सिनोमा

गर्भाशय कैंसर के लक्षण (Symptoms of Uterine Cancer)

साधारणतया गर्भाशय कैंसर का सबसे आम लक्षण स्पॉटिंग या योनि से रक्तस्राव होता हैं लेकिन योनि से रक्तस्राव होने का हमेशा यह मतलब नही होता कि उस महिला को गर्भाशय कैंसर हैं। गर्भाशय कैंसर(Uterine Cancer in hindi) के अन्य लक्षण इस प्रकार हैं।

  • मासिक धर्म के दौरान ज्यादा रक्तस्राव– इस बीमारी का एक मुख्य लक्षण मासिक धर्म के दौरान ज्यादा रक्तस्त्राव होना हैं या पीरियड का लंबे समय तक रहना भी इस बीमारीं का लक्षण हो सकता हैं। 
  • पेट में दर्द अगर किसी महिला को पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द रहता हैं तो यह भी गर्भाशय कैंसर होने का खतरा हो सकता हैं।
  • सेक्स करते समय दर्द- सेक्स करते समय दर्द होना भी इस बीमारी का एक लक्षण हो सकता हैं।
  • सफेद पानी आना- अगर किसी महिला को रजोनिवृत्ति के बाद योनि से सफेद पानी निकलने की शिकायत रहती हैं तो भी उसे गर्भाशय कैंसर होने का खतरा हो सकता हैं।
  • रक्तस्राव- अगर किसी महिला को ज्यादा रक्तस्राव रहने की शिकायत रहती हैं तो यह भी गर्भाशय कैंसर होने का एक संकेत हो सकता हैं।

गर्भाशय कैंसर के कारण (Causes of Uterine Cancer)

जैसा कि हमने पहले बताया था कि अभी तक इस बीमारी के होने की मुख्य कारण के बारें में अभी तक कुछ कहा नही जा सका है लेकिन फिर भी कुछ विशेषज्ञों का यही मानना हैं कि एस्ट्रोजन का बढ़ना इस बीमारी होने की वजह बन सकता हैं। दरअसल एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन महिलाओं के अंडाशय में बनने वाला सेक्स हार्मोन हैं, यह माना जाता है कि जब भी इन दोनों सेक्स हार्मोन में के संतुलन में किसी तरह का बदलाव होता है तो एंड्रोमेट्रियम में भी बदलाव आता है। इस कैंसर के लिये हुए एक शोध के अनुसार जब एस्ट्रोजन के स्तर में वृद्धि होती हैं लेकिन अगर प्रोजेस्टेरोन के स्तर में वृद्धि ना हो तो एंडोमेट्रियम की परत मोटी हो सकती हैं जो कैंसर का कारण बन सकता हैं।

इसके अलावा इसके कुछ कारण निम्नलिखित हैं।

  • मोटापा, शुगर और रक्तचाप- गर्भाशय कैंसर उन महिलाओं को होने का भी खतरा होता हैं जिन्हें मधुमेह, मोटापे या उच्च रक्तचाप की शिकायत होती हैं। 
  • रजोनिवृत्ति में देरी- अगर किसी महिला को रजोनिवृत्ति में देरी होती हैं तो यह भी गर्भाशय कैंसर को बढ़ावा देती हैं।
  • आयु- इस बीमारी के अधिकतर मामलों में यह देखा गया हैं कि यह बीमारी ज्यादातर 60 साल से लेकर 70 वर्षों की महिलाओं को होता हैं। इसके अलावा जो महिलाएं रजोनिवृत्ति की सीमा को पार कर चुकी होती हैं उन्हें इसका खतरा ज्यादा होता हैं।
  • हार्मोन में बदलाव- महिलाओं के शरीर मे मौजूद एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में बदलाव से भी गर्भाशय कैंसर होने का खतरा रहता हैं।
  • हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी- हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी होने से भी यह बीमारी हो सकती हैं।

गर्भाशय कैंसर से बचाव (Prevention of Endometrial Cancer)

इस कैंसर से बचाव करना मुश्किल हैं लेकिन इसको होने से रोकने के लिए आप कुछ उपाय जरूर कर सकते हैं। 

  • वजन पर नियंत्रण- अपने वजन पर नियंत्रण रखिये, इसके पीछे मुख्य वजह यह हैं कि शरीर में मौजूद वसा कोशिकाएं एस्ट्रोजन का निर्माण करती हैं, इसके अलावा यदि संभव हो तो स्तनपान कराये, ऐसा करने से एस्ट्रोजन और ओवुलेशन की गतिविधि कम होने लगती हैं। 
  • रक्तस्राव की जांच- किसी भी तरह के असामान्य रक्तस्राव की जांच करवाएं और डॉक्टर से सलाह लें।
  • ताजे फलों और सब्जियों का सेवन- अपने आहार में ताजे फलों और सब्जियों का सेवन करें और जंक फूड खाने से बचें।

कैंसर के बारे में कुछ और महत्वपूर्ण जानकारिया

मेरा नाम रूचि सिंह चौहान है ‌‌‌मुझे लिखना बहुत ज्यादा अच्छा लगता है । मैं लिखने के लिए बहुत पागल हूं ।और लिखती ही रहती हूं । क्योकि मुझे लिखने के अलावा कुछ भी अच्छा नहीं लगता है में बिना किसी बोरियत को महसूस करे लिखते रहती हूँ । मैं 10+ साल से लिखने की फिल्ड मे हूं ।‌‌‌आप मुझसे निम्न ई-मेल पर संपर्क कर सकते हैं। vedupchar01@gmail.com
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