Ultrasound during pregnancy in hindi

Ultrasound during pregnancy in hindi:गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड

कैसे पता करें गर्भावस्था सकारात्मक है या नकारात्मक? कैसे जाने कि आप गर्भवती हैं? कैसे जाने कि आपका शिशु सही प्रकार विकास कर रहा है या नहीं?  आधुनिकता की इस दुनिया में यह जानना अब और भी आसान हो गया है केवल एक अल्ट्रासाउंड(Ultrasound during pregnancy in hindi) के दौरान आप यह जान सकते हैं कि आप गर्भवती है या नहीं आपका शिशु ठीक प्रकार से विकास कर पा रहा है या नहीं। 

आज के समय में अल्ट्रासाउंड करवाना बहुत ही जरूरी और आम हो गया है इससे आप अपने गर्भ एवं शिशु की देखभाल अच्छे से कर सकते हैं। 

क्या होता है अल्ट्रासाउंड (What is Ultrasound during pregnancy in hindi)

अल्ट्रासाउंड के अंतर्गत डॉक्टर द्वारा पेट पर जेल लगाया जाता है यह जेल ध्वनि तरंगों को गर्भाशय तक भेजता है और यह शिशु को छूकर वापस आती है जिससे गर्भ में पल रहे शिशु की जांच आसान हो जाती है इस ध्वनि को आप सुन नहीं सकते परंतु यह महसूस होती है। 

कंप्यूटर इन तरंगों को वीडियो के रूप में बदल देता है और डॉक्टर इसे चित्रित कर देता है डॉक्टर इसके द्वारा बच्चे की हलचल धड़कन एवं उसके अंग ठीक प्रकार से जांच सकता है। अल्ट्रासाउंड के दौरान यह भी पता चल जाता है कि आपके गर्भ में कितने शिशु पल रहे हैं। इसकी तस्वीरें लेकर आप यादगार के लिए अपने पास रख सकते हैं।

आजकल अल्ट्रासाउंड 3D और 4D के रूप में उपलब्ध है। और यह लोगों के बीच काफी लोकप्रिय भी है। क्योंकि इस अल्ट्रासाउंड से ऐसा लगता है कि आप खुद शिशु की ही तस्वीर ले रहे हैं। यह एक जीवंत तस्वीरों की तरह लगता है। 

गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड करवाने का उद्देश्य(The purpose of Ultrasound during pregnancy in hindi)

  • अल्ट्रासाउंड की मदद से आप यह है जान पाते हैं कि आपके शिशु की धड़कन ठीक प्रकार से चल रही है या नहीं।
  • इससे यह भी पता चल जाता है कि आपके घर में 1 शिशु पल रहा है या एक से अधिक शिशु पल रहा है।
  • ऐसी अवस्था जिसमें आमतौर पर शिशु फैलोपियन ट्यूब में भूर्ण विकसित होने लगता है, जिसे एक्टोपिक गर्भावस्था कहते हैं का भी पता चल जाता है। 
  • गर्भावस्था के दौरान किसी भी कारणवश रक्त स्त्राव होने लग जाता है यह अल्ट्रासाउंड से जानना बेहद आसान हो जाता है कि आपको रक्त स्त्राव किस कारण से हो रहा है।
  • अल्ट्रासाउंड के दौरान शिशु को मापा जा सकता है एवं गर्भावस्था की सही तिथि पता की जा सकती है।
  • शिशु की सही प्रकार जांच करना कि उसके आप सही से विकसित हो पा रहे हैं या नहीं। 
  • किसी भी विशेष प्रकार की गर्भावस्था या असामान्य गर्भावस्था की स्थिति की जांच करना।
  • शिशु के होने वाले रक्त प्रभाव के बारे में भी जानना आसान हो जाता है।
  • अल्ट्रासाउंड के दौरान ग्रीवा का मुख् एवं उसकी लंबाई आसानी से मापी जा सकती है।
  • गर्भनाल की जांच करना।

क्या है गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड करवाने की समय सीमा(What is the time frame for ultrasound during pregnancy)

आज के समय में गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड करवाना बेहद ही आसान और जरूरी प्रक्रिया है। इससे गर्भ में पल रहे शिशु की जांच करना एवं उसकी देखरेख करना और भी आसान हो जाता है।

गर्भावस्था के दौरान कम से कम गर्भवती महिला का 2 बार अल्ट्रासाउंड किया जाता है। पहला अल्ट्रासाउंड पहली तिमाही और दूसरा अल्ट्रासाउंड दूसरी तिमाही में किया जाता है।

पहली तिमाही का अल्ट्रासाउंड(First trimester ultrasound)

पहला अल्ट्रासाउंड 6 से 9 हफ्ते के बीच में किया जाता है जिसे पहली तिमाही का अल्ट्रासाउंड भी कहा जाता है। यह प्रसव पूर्व से पहले कि प्रक्रिया होती हैं। पहली तिमाही के अल्ट्रासाउंड के निम्नलिखित उपयोग हैं:

  • पहली तिमाही के अल्ट्रासाउंड(Ultrasound during pregnancy in hindi) के दौरान भूर्ण को माप कर अनुमानित तारीख की पुष्टि की जाती है।
  • इस दौरान भ्रूण की धड़कन को जांचा जाता है।
  • यह जांचना की गर्भावस्था सही प्रकार से है या नहीं यानी यह एकटॉपिक कर व्यवस्था तो नहीं है।
  • भूर्ण की संख्याओं को जानना।

दूसरी तिमाही का अल्ट्रासाउंड(Second trimester ultrasound)

दूसरी तिमाही का अल्ट्रासाउंड 18 से 22 हफ्तों के बीच किया जाता है। इस दौरान भूर्ण पूरी तरह विकसित हो चुका होता है और आप भूर्ण को पुर्ण प्रकार से जांच सकते हैं। और यह भी जांच कर सकते हैं कि भूर्ण सही प्रकार से विकसित हो पा रहा है या नहीं। 

  • इस अल्ट्रासाउंड के दौरान भूर्ण के अंगों की सही प्रकार जांच की जा सकती है यह देखा जा सकता है कि भूर्ण अंग सही प्रकार विकास कर पा रहे हैं या नहीं।
  • इस अल्ट्रासाउंड के दौरान भ्रूण का लिंग जांचा जा सकता है परंतु यह भारत में निषेध है।

गर्भावस्था के दौरान अतिरिक्त अल्ट्रासाउंड(Extra ultrasound during pregnancy)

Third trimester of pregnancy in hindi:गर्भावस्था की तीसरी तिमाही..

कभी-कभी गर्भावस्था किसी जोखिम परिस्थिति में हो जाती है जिस कारण कुछ अतिरिक्त अल्ट्रासाउंड भी करवाने की आवश्यकता पड़ती है। जैसे कि यदि आपको गर्भावस्था के दौरान स्पॉटिंग हो जाती है तो डॉक्टर यह जांच करता है कि इसे सही प्रकार से गर्भ में है या नहीं।

यदि आप एक से अधिक बच्चे की मां बन रही है तो भी डॉक्टर बार-बार अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह देता है।

इसके अलावा कोरिओनिक विलस सैंपलिंग (CVS- Chorionic villus sampling), एम्निओसेंटिस (Amniocentesis) की परिस्थितियों में भी अल्ट्रासाउंड की सलाह दी जाती है।

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