Swelling of feet during pregnancy in hindi

Swelling of feet during pregnancy in hindi:प्रेगनेंसी के दौरान इन कारणों से आती है पैरों में सूजन

हर महिला(Swelling of feet during pregnancy in hindi) अपने जीवन में गर्भावस्था  के दौर से गुजरती है। यह अवस्था उन महिलाओं के लिए बहुत ही आसान हो जाती है जो पहले से मां बन चुकी होती है परंतु जो महिला पहली बार मां बन रही होती है यह अवस्था उसके लिए बहुत ही कठिन हो जाती है क्योंकि वह किसी भी अवस्था से पहले से परिचित नहीं होती और उसे बड़ी का सामना करना पड़ता है। 

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत सी मुश्किल एवं परेशानियों से गुजरना पड़ता है। कुछ परेशानियां बेहद आसानी से टल जाती है परंतु कुछ परेशानियां बहुत लंबे समय तक चलती है और गर्भावस्था का समय काटना मुश्किल कर देती हैं। 

बहुत ही महिलाओं को पैर में सूजन आ जाने(Swelling of feet during pregnancy in hindi) के कारण चलने फिरने में बड़ी कठिनाई हो जाती है। अधिकतर समय प्रेग्नेंसी के पांचवे महीने के बाद से यह दिक्कत शुरू हो जाती है। गर्भवती महिलाओं में ब्लड सरकुलेशन एवं किसी भी अन्य वजह से सूजन हो जाती है। 

गर्भावस्था में डॉक्टर के द्वारा सबसे ज्यादा पानी पीने की सलाह दी जाती है कारणवश पानी की कमी होने से पैरों में सूजन पैदा हो जाती है जिससे महिलाओं को कठिनाइ होती हैं। इसी कारण ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए। 

आज हम अपने इस लेख में ऐसे ही कुछ और कारणों को जानेंगे जिससे महिलाओं के पैरों में सूजन देखी जाती है। आखिरकार गर्भवती महिलाओं को पैरों में और हाथों में सूजन क्यों आ जाती है? क्या है इसके कारण और क्या है बचाव?

  • गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को बहुत अत्यधिक थकावट महसूस होती है यदि महिला लंबे समय तक किसी एक पोजीशन में रहती है जैसे कि यदि बहुत देर तक बैठी रहती है या फिर बहुत देर तक खड़ी रहती है तो सूजन की समस्या पैदा हो जाती है। 
  • गर्भवती महिलाओं में हार्मोन बहुत जल्दी-जल्दी बदलने लगते हैं यह हार्मोन चेंज होना बहुत से परिवर्तनों को साथ लेकर आता है इनमें से एक परिवर्तन सूजन आना होता है अर्थात महिलाओं को पैरों में सूजन हार्मोन चेंज होंने के कारण से भी हो जाती है। 

कैसे करें सूजन से बचाव?(How to prevent Swelling of feet during pregnancy in hindi?)

  • गर्भावस्था के दौरान शरीर में पानी की कमी हो जाने के कारण अक्सर महिलाओं के पैरों में सूजन हो जाती है। कारणवश महिला को गर्भावस्था के दौरान ज्यादा से ज्यादा पानी का सेवन करना चाहिए। जितना ज्यादा पानी का सेवन एक महिला करेगी इससे ज्यादा से ज्यादा यूरिन बनेगा जिससे सभी विषैले पदार्थ शरीर से निकल जाएंगे। इसलिए कम से कम दिन में 10 गिलास पानी का सेवन अवश्य करना चाहिए।
  • इस समय में कम से कम नमक का सेवन करना चाहिए क्योंकि नमक का सेवन करने से पैरों में अक्सर सूजन हो जाती है। यदि आप नमक खाने की ज्यादा शौकीन है तो आपको अपने पर काबू करना होगा और नमक का सेवन करने से सचेत रहना होगा। नहीं तो यह आपके शरीर में समस्या पैदा कर सकता है।
  • गर्भावस्था के दौरान पैरों में आई सूजन(Swelling of feet during pregnancy in hindi) से बचाव के लिए गुनगुने पानी में एक टीस्पून नमक डालकर 10 से 15 मिनट तक पैरों को पानी में डालकर रखना चाहिए इससे शरीर के साथ-साथ पैरों में भी आराम मिलता है और थकावट दूर हो जाती है। साथ ही साथ पैरों की सूजन भी कम होने लगती है। 
  • गर्भावस्था के दौरान कहीं भी एक जगह खड़े नहीं रहना चाहिए इसके लिए समय-समय पर टहलना चाहिए एवं सुबह के समय में सैर करनी बहुत ही अच्छी और लाभकारी होती है। 
  • पैरों में आई सूजन के लिए आप किसी की मदद से अपने पैरों में गर्म तेल की मालिश करवा सकते हैं इससे आपको पैरों की सूजन में बहुत आराम मिलता है। 
  • दूध पीना है आवश्यक यानी कि गर्भावस्था में अधिकतर दूध का सेवन एवं दूध से बने पदार्थ का सेवन करना चाहिए इससे आपके शरीर में निर्धारित एनर्जी बनी रहती है एवं सूजन में भी कमी होती है। 
  • ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए ताकि शरीर में किसी प्रकार की कमी ना हो और सूजन से बचाव हो सके।
  • आदित्य महिलाओं को बाई करवट लेकर सोना चाहिए इससे विना कावा नस पर  दबाव पड़ता है जिससे सूजन नहीं होती। 
  •  कभी भी अपने पैरों को पैरों के ऊपर एवं टखनों को टखनों के ऊपर रखकर नहीं बैठना चाहिए।
  •  नियमित एवं निश्चित समय पर व्यायाम करना चाहिए जैसे कि तैराकी एवं एक्सरसाइ बाइक का इस्तेमाल कड़ना सेहतमंद होता है।
  •  जब टखनों के पास खून इकट्ठा हो जाता है तब सूजन की दिक्कत पैदा हो जाती है। इसके लिए जब आप सुबह उठे तो जुराब पहन लें जिससे टखनों के पास खून इकट्ठा होने की जगह ना बचे और आपके पैरों में सूजन ना हो सके।

 निष्कर्ष(Conclusion)

 गर्भावस्था का समय कितना ही मुश्किल और हम परेशानियों भरा क्यों ना हो परंतु महिला इस अवस्था में सभी परेशानियों का सामना करके अपने शिशु को जन्म देती है।इस  अवस्था में महिला को अपनी पूरी तरह देखभाल करना आवश्यक होता है यह बच्चे की सेहत के लिए भी आवश्यक होता है। इस समय मैं महिला को ज्यादा से ज्यादा सिर्फ उसी पदार्थ का सेवन करना चाहिए जो उसके और उसके बच्चे के लिए लाभकारी होते हैं ऐसे किसी भी पदार्थ का सेवन करने से बचें जो आपके और आपके शिशु को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचाए। 

मेरा नाम रूचि सिंह चौहान है ‌‌‌मुझे लिखना बहुत ज्यादा अच्छा लगता है । मैं लिखने के लिए बहुत पागल हूं ।और लिखती ही रहती हूं । क्योकि मुझे लिखने के अलावा कुछ भी अच्छा नहीं लगता है में बिना किसी बोरियत को महसूस करे लिखते रहती हूँ । मैं 10+ साल से लिखने की फिल्ड मे हूं ।‌‌‌आप मुझसे निम्न ई-मेल पर संपर्क कर सकते हैं। vedupchar01@gmail.com
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