Pregnancy second month(गर्भावस्था का दूसरा महीना)-सम्पूर्ण जानकारी

Second month pregnancy in hindi:गर्भावस्था का दूसरा महीना

प्रेगनेंसी की खबर सुनते ही माता एवं पिता खुशी से फूले नहीं समाते यह खबर उन दोनों के जीवन की सबसे बड़ी खुशी होती है। क्योंकि कहीं ना कहीं यह दोनों के जीवन को बदल कर रख देती है। धीरे-धीरे जब समय भरता जाता है, तो यह खुशी भी दुगनी होती चली जाती है।पहले हमने जानकारी दी थी गर्भावस्था के पहले महीने के बारे में |अब हम बात करेंगे गर्भावस्था के दूसरे महीने यानी दूसरा महीना(Second month pregnancy in hindi) लगने पर, एक गर्भवती महिला में क्या क्या बदलाव होते हैं। तथा उसके शरीर में क्या-क्या चेंज आ सकते हैं। किन-किन चीजों का खास ध्यान रखा जा सकता है?

प्रेग्नेंसी का दूसरा महीना शुरू होते ही कुछ और अन्य बदलाव शरीर के अंदर दिखने लगते हैं। यह बदलाव काफी परेशानी भरे भी हो सकते हैं। इस महीने के कुछ बदलाव ज्यादातर पहले महीने के बदलावों से मिलते जुलते ही होते हैं, फिर भी हमें दूसरे महीने की चीजों का खास ध्यान रखना है। आइए इस बात पर कुछ विचार विमर्श करते हैं। 

  • सबसे पहला और मेन बात जो हमें दूसरे महीने(Second month pregnancy in hindi) में दिखाई पड़ता है वह है ब्रा टाइट होना। इसमें घबराने की कोई बात नहीं है, ऐसा एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन बढ़ने से होता है जो कि प्रेग्नेंट लेडी के लिए एक आम बात है। 
  • जैसे कि हम सभी जानते हैं, कि गर्भधारण होने के बाद पेट बढ़ने लगता है। तो दूसरे महीने आपको पेट का आकार यानी गर्भाशय एक संतरे के आकार का दिखाएं देने लगता है। जोकि मां बनने वाली महिला के लिए बहुत ही खुशी की बात होती है। 
  • बार-बार कुछ ना कुछ खाने का मन करता है। ज्यादातर महिलाओं को खट्टा खाने का मन करता है। गर्भवती महिला का दूसरा महीना शुरू होते ही उसका वजन भी बढ़ने लगता है, तथा कुछ शारीरिक बदलाव होने के कारण सांस लेने में भी तकलीफ महसूस हो सकती है। परंतु यह घबराने की बात नहीं है।
  • अब आपको बता दें कि दूसरा महीना शुरू होते ही बच्चे का विकास भी एक मां को महसूस होने लगता है। हर मां अपने होने वाले बच्चे के विकास को महसूस  करती है और उसे समझती है। गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे भ्रूण का आकाश दिल से महीने करीब 1 इंच का हो जाता है और उसका वजन 14 ग्राम तक हो जाता है
  • दूसरा महीना लगते ही भ्रूण का हृदय काम करना शुरू कर देता है और दिमाग भी विकसित होने लगता है तभी कहा जाता है कि प्रेग्नेंट लेडी को सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। क्योंकि इसका सीधा सीधा असर उसके गर्भ में पल रहे भ्रूण पर यानी उसके विकास पर पड़ता है। 
  • दूसरे महीने में बच्चे की आकृति एक मुड़ी हुई ट्यूब की तरह होती है। जिसमें एक तरफ उसका सर एवं दूसरी तरफ निचला हिस्सा होता है।
  • हार्मोन चेंजिंग के कारण मूड चिड़चिड़ा रहने लगता है।
  • दूसरा महीना लगने के बाद से मॉर्निंग सिकनेस और बढ़ जाती है। एवं सुबह-सुबह उल्टी होना जी मिचलाना आदि लक्षण नजर आते हैं।
  • सीने में हल्की जलन रहने लगती है।

खान-पान का रखे ख्याल(Take care of food in pregnancy second month):

  • एक अच्छे शिशु को जन्म देने के लिए गर्भवती महिला अपने खान-पान में खास ध्यान रखना पड़ता है दूसरा महीना शुरू होते ही गर्भवती महिला को फॉर लेट से भरपूर खाद्य पदार्थ का सेवन अधिक करना चाहिए जो कि गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए काफी लाभदायक होता है। 
  • दूसरे महीने में इस तरीके का डाइट चार्ट बनाया जाए जिसमें की हरी पत्तेदार सब्जियां नॉट बीन टेकन मांस व साबुत अनाज का सेवन अधिक से अधिक हो सके। इसके अलावा गर्भवती महिला का भोजन आयरन युक्त भी होना चाहिए। तथा कैल्शियम प्रोटीन आदि की मात्रा भी उसके भोजन में अधिक से अधिक  शामिल होनी चाहिए।

क्या ना खाएं(What not to eat in pregnancy second month )?

गर्भावस्था का दूसरा महीना शुरू होते ही कुछ इन चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए। जैसे कि सॉफ्ट चीज, शराब, तंबाकू, कच्चे अंडे आदि। गर्भावस्था में स्वस्थ रहने के लिए पहले महीने की तरह व्यायाम पर भी अधिक ध्यान देना चाहिए, जिससे मां और होने वाले बच्चे का स्वास्थ्य ठीक रहे। गर्भावस्था में शरीर में ज्यादातर भारीपन सा रहने लगता है तो इसके चलते हमें रोजाना तकरीबन 20 मिनट की शहर जरूर करनी चाहिए। जो कि हमारे शरीर के लिए काफी फायदेमंद होती है। 

किन बातों का रखे ध्यान(What to keep in mind in Second month pregnancy in hindi ):

एक गर्भवती महिला को इन सब चीजों के साथ साथ समय-समय पर डॉक्टर से जांच करवाते रहना चाहिए। कुछ ऐसे टेस्ट लगातार होते रहने चाहिए। जिससे कि हमें अपने शरीर और गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य का पता चलता रहे। यह डॉक्टरी जांच कुछ इस तरह की जांच जैसे कि शुगर की जांच, प्रोटीन टेस्ट, हिमोग्लोबिन, और आयरन के स्तर की जांच, गर्भवती महिला को कहीं और संक्रमण तो नहीं है। इसकी जांच चिकन पॉक्स, और रूबेला की जांच, साथ ही गर्भवती महिला के वजन की जांच होती है।

 दूसरे महीने के दौरान डॉक्टर की सलाह के अनुसार फोलिक एसिड का सेवन करते रहें।

कुछ और अन्य बातों का ध्यान दूसरे महीने में रखें(Take care of some other things in the second month)

जैसे कि ज्यादा से ज्यादा आराम करें, खूब तरल पदार्थ वाली चीजों का सेवन करें, एक बार पूरा भोजन करने की बजाय थोड़ी थोड़ी देर में थोड़ा थोड़ा खाना खाते रहे जिससे कि खाना पचाने में आसानी होगी। जब भी फल और सब्जियां खाएं तो उनको पहले अच्छी तरह से धो लें, ताकि इंफेक्शन ना हो इन सब चीजों का खास ध्यान रखें। दूसरा महीने में हमें योनि से हल्का हल्का ब्लड यानी स्पॉटिंग होने लग सकता है। परंतु इससे घबराए ना। बल्कि तुरंत अपने डॉक्टर यानी गायनो से परामर्श करें।

कुछ और मह्त्वपूर्ण जानकारियाँ

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