Millet in Hindi

Millet in Hindi : बाजरा क्या है? इसके फायदे, उपयोग और नुकसान

बाजरा की जानकारी: What is Millet in hindi

  • यदि देखा जाए तो, बाजरा हमारे पुर्खों द्वारा, इस्तेमाल में  लाया जाने वाला, बहुत ही पुराना धान होता है। इसको अंग्रेज़ी में, ‘मिलेट’ कहते हैं। 
  • अगर हम क्षेत्रों की बात करें, जहाँ ये ज़्यादा इस्तेमाल होते हैं, तो यह महाराष्ट्र, राजस्थान और दक्षिण भारत में, आम तरह से उपयोग किया जाने वाला खाद्य पदार्थ है।
  • पहले के समय, इसे सिर्फ़ ग़रीब तबके के लोग खाते थे। पहले समय में तो, यह कुछ ग्रामों का अहम  खाद्य पदार्थ होता था।
  • वैसे, बाजरा में काफ़ी सारे सेहत सम्बंधी फ़ायदे होते हैं, और इसी कारण आपको बूढ़े लोग, इसे इस्तेमाल करने की परामर्श देते हैं। 
  • सबसे अच्छी बात यह होती है की, बाजरा का मूल्य अधिक नही होता, और यह बाज़ार में, बहुत ही आराम से मिल जाता है। यही सबसे बड़ी वजह है, की हम सब इसका उपयोग बड़े आराम से कर सकते हैं। अगर हम इसका उपयोग, राज्यों के अनुसार देखें, तो भारत में इसका उपयोग, अहम रूप से राजस्थान, पंजाब, गुजरात, उत्तर-प्रदेश, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और पंजाब में होता है।
  • बाजरा के उपयोग काफ़ी सारे व्यंजन बनाने में होता है। उदाहरण के रूप में, बाजरे से खिचड़ी, पूड़ी, मोठ, चीला, हलवा, दलिया और बियर बनाया जा सकता है। वैसे बाजरे का चारा, पशुओं के लिए तो बहुत लाभदायक होता ही है, पर यही हमारे लिए भी काफ़ी फ़ायदेमंद होता है।

बाजरा के फायदे और उपयोग : Advantages and uses of millet

यह हम आपको पहले ही बता चुके हैं, की बाजरा हमारे स्वास्थ्य के लिए काफ़ी लाभदायक  होता है। यह रहे बाजरा के कुछ लाभ: Millet in Hindi

बाजरा के लाभ : Benefits of millet in hindi

बाजरा के लाभ उच्च कोलेस्ट्रॉल के लिए 

कोलेस्ट्रॉल हमारे दिल की सेहत के लिए, बहुत ज़्यादा फ़ायदेमंद नही होता है। बाजरा में, काफ़ी  ज़्यादा तादाद में, फाइबर पाया जाता है।  इससे हमारे बदन में, कोलेस्ट्रॉल का लेवल गिर जाता है, और यह हमारी सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद होता है।-Millet in Hindi

 बाजरा में मौजूद रेशे, शरीर की शुद्धि में सहायता करते हैं, और बिना गुणों वाले कोलेस्ट्रॉल से, मुक्ति दिलाने में सहायता करते हैं। कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए, बाजरे का सेवन बहुत लाभदायक  होता है।

बाक़ी फ़ायदे निम्न हैं:

  • दमे की बीमारी को रोकना
  • बिगड़े हुए कोलेस्ट्रोल को कम करना
  • बदन के ख़राब पदार्थों को साफ़ करना
  • ब्लड-शुगर को नियंत्रित करना 
  • कैन्सर के भय को कम करना 
  • बाजरा और ख़राब कोलेस्ट्रॉल का क्या सम्बंध होता है?

 कोलेस्ट्रॉल हमारे दिल की सेहत के लिए, फ़ायदेमंद नही होता है। बाजरा के भीतर, उच्च फाइबर या रेशे पाए जाते हैं, जो  हमारे शरीर से, ख़राब कोलेस्ट्रोल की मात्रा को कम करने के लिए, काफ़ी लाभदायक होता हैं। बाजरा में उपस्थित फ़ाइबर, शरीर को साफ़ भी करता है, और ख़राब कोलेस्ट्रोल से बचाव भी करता है। इसी वजह से, कोलेस्ट्रोल के लेवल को कंट्रोल में रखने के लिए, बाजरा का सेवन करना, बहुत आवश्यक होता है।

मधुमेह के लिए भी होते हैं, बाजर के फायदे 

अगर हम रुके और आस-पास  की जीवनशैली को देखें, तो हमें दिखेगा, कि आजकल की ज़िंदगी में, मधुमेह होना, एक बहुत ही आम बात हो गयी है।इस रोग ने, सारी दुनिया में, कई लोगों को, अपनी चंगुल में ले लिया है।-Millet in Hindi

यह माना जाता है, कि अगर बाजरा का, खाने में उपयोग किया जाए, मधुमेह का भय कम हो जाता है। अगर आप बाजरा का रोज़ इस्तेमाल करते हैं, तो आप इस बीमारी को नियंत्रण में रख सकते हैं।

बाजरा की ख़ूबियाँ कैंसर से बचाव  के लिए

कुछ वर्षों पहले ही, यह बात सामने आयी है, कि यदि महिलाएँ फ़ाइबर का इस्तेमाल  करें, तो उन्हें स्तन कैन्सर होगा ही नही। अगर एक महिला को रोज़ाना तीस ग्राम फ़ाइबर खिलाया जाए, तो उसमें पचास फ़ीसदी कैन्सर होने का चांस, गिर जाएगा।

बाजरा का इस्तेमाल दमा के उपचार में

यदि किसी को बचपन से ही, अस्थमा या दमा का रोग है, तो उन लोगों के लिए, बाजरा काफ़ी फ़ायदेमंद होता है। यह अस्थमा होने से पहले ही, उसे रोक देता है। अगर कोई शिशु, बचपन से ही ज़्यादा मात्रा में बाजरे का इस्तेमाल करता है, तो उसे दमा होने का डर ही कम हो जाता है। 

इस दिशा में एक शोध भी हुई है, जो यह बताता है, कि जो बच्चा बचपन से ही ज़्यादा मात्रा में बाजरा खाता है, उसे दमे की बीमारी होने की सम्भावना, पंद्रह प्रतिशत कम हो जाती है।

बाजरा का इस्तेमाल, वजन कम करने में

यह हम पहले भी बता चुके हैं , कि बाजरा में सही मात्रा में फ़ाइबर पाया जाता है। इसको आप अपने भोजन का, एक अभिन्न अंग बना सकते हैं। इसकी सबसे मज़ेदार चीज़ यह होती है, कि इसे आप भले ही कम खाएँ, पर इससे आपको ऊर्जा या एनर्जी, बहुत ज़्यादा और काफ़ी लम्बे समय तक मिल जाती है। 

यदि आप इसे थोड़ा सा भी खाएँ, तब भी आपको, बहुत देर तक, दोबारा खाने की इच्छा नहीं होती है इसी वजह से आप इसे, ज़्यादा खाने से बच सकते हैं। तो जो लोग, अपने शरीर का वजन कम करना चाहते हैं, वो बाजरे को अपने भोजन के, एक अहम रूप में डाल सकते हैं। इसका सीधा प्रभाव उनके वज़न पर पड़ेगा ही।

बाजरा का नींद के लिए फ़ायदा

बाजरा में एक तत्व पाया जाता है, जिसे ‘ट्रीप्टोफन’ कहते हैं। यह तत्व, हमारे बदन में ‘सेरोटोनिन’ के लेवल को, बढ़ाता है। सेरोटेनिन एक ऐसा तत्व है, जो हमारे शरीर में, तनाव नही बनने देता, बल्कि उसे कम कर देता है। सोने से पहले, यदि आप हर रात, बाजरे के दलिये को थोड़ी मात्रा में खाएँ, तो उससे, आपको बड़ी अच्छी, आरामदायक नींद आएगी।

बाजरा का त्वचा या स्किन के लिए लाभ
  • यदि देखा जाए, तो बाजरा में एक अच्छी-ख़ासी मात्रा में, एंटीऑक्सीडेंट और फिनोलिक्स पाए जाते हैं। 
  • यह तत्व बढ़ती उम्र पर विराम लगाने का काम करते हैं। इसी चीज़ के लिए, यह प्रसिद्ध भी है। प्रसिद्ध इसलिए, क्यूँकि बाजरा त्वचा के, बढ़ती उम्र के संकेत दिखने ही नही देता। 
  • इससे हमारी त्वचा को, बढ़ते उम्र के ज़ाहिर से संकेत, काफ़ी कम दिखते हैं। यह त्वचा को सेहतमंद भी, बना कर रखता है। एक ओर, ये हमारी त्वचा को सुंदर और ताज़ा बनाकर रखता है और वहीं दूसरी ओर, यह हमारे चेहरे पर, झुर्रियाँ भी ग़ायब कर देता है। 
  • यह पूरी प्रक्रिया, हमें ज़्यादा जवान दिखने में मदद करती है। 
  • इन सब के साथ, बाजरा, इंसान की पाचन प्रणाली को, सही चलाने में भी सहायता करता है। इससे, हमारे शरीर की ख़ूबियाँ भी, बाहर दिखने लगती हैं।

बाजरा के दुष्प्रभाव : Side Effects of Millets in Hindi

यह बात हम बचपन से जानते हैं, की किसी  भी वस्तु को, ना तो जीवन में, और ना ही शरीर में, एक हद से ज़्यादा इस्तेमाल करना चाहिए। यह हमारे लिए, काफ़ी सारे दुष्प्रभाव ला सकता है। इसी वजह से यह मान्यता है, की बाजरे को जब भी आप इस्तेमाल करें, तो आप इस बात का ख़्याल रखें, कि आप इसका इस्तेमाल कम मात्रा में ही करें। अगर आप इसका काफ़ी ज़्यादा मात्रा में इस्तेमाल करते हैं, तो आपको इससे नीचे दी गयी दिक्कतें हो सकती हैं:

  •  बाजरा के भीतर ‘गोईट्रोजन’ होता है। इसके कारण थायराइड की दिक्कत हो सकती है।
  • बाजरा के अधिक मात्रा में इस्तेमाल से, स्किन या त्वचा रूखी हो सकती है।
  • बाजरा का अधिक  इस्तेमाल करना, तनाव, चिंता और सोचने की शक्ति पर भी असर डालता है।

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मेरा नाम रूचि सिंह चौहान है ‌‌‌मुझे लिखना बहुत ज्यादा अच्छा लगता है । मैं लिखने के लिए बहुत पागल हूं ।और लिखती ही रहती हूं । क्योकि मुझे लिखने के अलावा कुछ भी अच्छा नहीं लगता है में बिना किसी बोरियत को महसूस करे लिखते रहती हूँ । मैं 10+ साल से लिखने की फिल्ड मे हूं ।‌‌‌आप मुझसे निम्न ई-मेल पर संपर्क कर सकते हैं। vedupchar01@gmail.com
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