Fibromyalgia in hindi

Fibromyalgia in hindi:फाइब्रोमायल्जिया इन हिंदी ,लक्षण,कारण,इलाज

हालाँकि वैज्ञानिक खोज में इन्सान ने बहुत  तरक्की कर ली हैं, लेकिन कुछ चीजें अभी भी इन्सान के सोच से बाहर हैं, जीनपर अभी भी इन्सान का कोई कंट्रोल नहीं। कुछ बिमारिओं पर अभी भी इलाज उपलब्ध नहीँ, तो कुछ बिमारिओं के लक्षण एवं कारण अभी भी पहचान के नहीँ । ऐसी बिमारिओं की रोकधाम और भी कठिन हो जाती हैं । तो फिर आइये, जानकारी लेते हैं ऐसे ही एक बिमारी की फाइब्रोमायल्जिया(Fibromyalgia in hindi),जो अभी तक पहचान पाना दुनिया भर के डॉक्टरों के लिये एक चैलेंज हैं |

फाइब्रोमायल्जिया क्या होता है ?-What is Fibromyalgia in hindi ?

फाइब्रोमायल्जिया एक प्रकार से मांशपेशियों और हड्डियों में दर्द उत्पन्न करने वाला विकार हैं, इस बीमारी से पीड़ित लोगों को थकान की दिक्कत होने लगती हैं और इस बीमारी की वजह से नींद और मस्तिष्क से जुड़ी कई दिक्कतें होने लगती हैं। इस बीमारी के होने पर उठने वाले दर्द में सनसनी भी महसूस होने लगती हैं, यह भी कहा जाता हैं कि यह बीमारी पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को ज्यादा होता हैं। इस बीमारी से ग्रसित लोगों में आंतो से जुड़े रोग, अवसाद और चिंता भी हो सकती हैं।

डॉक्टरों के मुताबिक इस विकार के ठोस कोई लक्षण नही हैं, मगर आम तौर पर कोई शारीरिक चोट,सर्जरी या फिर मानसिक तनाव, इस विकार का कारण हो सकतें हैं।

फाइब्रोमायल्जिया के लक्षण-Symptoms of Fibromyalgia in hindi

इस बीमारी में कई बार लक्षण तो जल्दी से सामने आ जाते हैं लेकिन कई बार इसमे लक्षण बिना किसी समस्या के भी धीरे-धीरे सामने आने लगते हैं। वैसे कई बार इस बीमारी के लक्षण शरीर मे किसी तरह का संक्रमण, चोट या किसी तरह के मनोवैज्ञानिक तनाव के बाद भी दिखने लगते हैं। चलिये आइये इस बीमारी के कुछ लक्षणों के बारें में जानते हैं।

लंबे समय तक दर्द – अगर किसी को हल्के दर्द की शिकायत लगातार 1 से 3 महीने तक बनी रहती हैं, ऐसा दर्द शरीर के दोनो तरफ या कमर के नीचे की तरफ हो सकता हैं। इस प्रकार यह दर्द गम्भीर रूप धारण कर लेता हैं और यह भी फाइब्रोमायल्जिया का लक्षण होता हैं।

थकान- इस बीमारी का सबसे मुख्य लक्षण शरीर मे थकान महसूस होना होता हैं जैसेकि मानिए कोई व्यक्ति काफी देर से सो रहा हो और अभी सोकर उठा हो लेकिन फिर भी उसे नीदं महसूस हो रही हो तो हो सकता है उस व्यक्ति को यह बीमारी हो। इसके अलावा बीमारी में नींद से जुड़ी अन्य बीमारी जैसे रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम और स्लीप एप्रिया भी हो सकता हैं।

अन्य सामान्य लक्षण – फाइब्रोमायल्जिया के चलते मरीजों में और भी लक्षण पाए जाते हैं, जैसे की डिप्रेशन,सिरदर्द,पेट के निचले हिस्से में दर्द। 

फाइब्रोमायल्जिया के क्या कारण होते है ?-What are the Causes of Fibromyalgia in hindi?

सही मायनों में अगर कहा जाए तो डॉक्टरों को अभी तक इस बीमारी होने का कोई ठोस कारण नही मिला हैं और चिकित्सा के क्षेत्र में अभी तक इस बीमारी के होने की कारण की खोज चल रही हैं। लेकिन फिर भी कुछ शोध होने के बाद इस बीमारी के कारणों के बारे में पता चल सका हैं।

शरीर मे संक्रमण-

अगर आप के शरीर मे पहले से किसी तरह का संक्रमण हैं तो आपको इस बीमारी के होने का खतरा रहता हैं। या इसके लक्षणों को पहले हुआ संक्रमण और गहरा कर सकता है।

अनुवांशिकता

फाइब्रोमायल्जिया अक्सर अनुवांशिक होता है। यदि आपके परिवार में किसी व्यक्ति को फाइब्रोमायल्जिया है, तो परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस बीमारी की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता हैं। कुछ आनुवंशिक बदलाव , जिनकी अभी तक पहचान नहीं हो पाई है,वह जिन भी एक व्यापक कारण हो सकते हैं।

तनाव

लगातार तनाव की स्थिति में रहना आपके शरीर को लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकते हैं इसके अलावा तनाव आपके शरीर मे हार्मोन्स को बिगाड़ सकता हैं और यह फाइब्रोमायल्जिया होने का भी एक कारण बनता हैं।

आघात

अगर किसी को किसी भी तरह का आघात लगता हैं भले ही वो शारीरिक आघात हो या मानसिक आघात, ऐसे लोगो को भी फाइब्रोमायल्जिया की बीमारी हो सकती हैं। इस कारण को पोस्ट ट्रोमैटिक तनाव विकार से संबंधित माना गया हैं।आम तौर पर महिलाएं ज्यादा तनाव का सामना करती हैं, इसी वजह से महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले फाइब्रोमायल्जिया ज्यादा तौर पर पाए जाते हैं। 

रूमेटिक रोग

अगर किसी को पहले से रूमेटाइड अर्थराइटिस या लुपस जैसे रुमेटिक रोग हैं , तो उन्हें फाइब्रोमायल्जिया होने का खतरा बढ़ जाता हैं|

फाइब्रोमायल्जिया से बचाव के उपाय (Prevention From Fibromyalgia)

अगर किसी को फाइब्रोमायल्जिया बीमारी हैं तो इस बीमारी को रोका नहीं जा सकता हैं लेकिन कुछ उपाय करने से और प्रतिदिन जीवन शैली में कुछ बदलाव लाकर इसकी गंभीरता को कम किया जा सकता हैं। आप इस बीमारी को होने से रोकने के लिए निम्नलिखित कुछ उपाय कर सकते हैं।

संतुलित आहार शैली अपनाएं- इस बीमारी को होने से रोकने के लिए आपको संतुलित आहार शैली अपनानी चाहिए, अपने आहार में अनाज, ताजे फल और ताजे सब्जियों को शामिल कीजिये।

पर्याप्त नींद लें- इस बीमारी से बचने के लिए पर्याप्त नींद लेनी चाहिए।

नियमित रूप से व्यायाम कीजिये- वैसे भी हमें अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए व्यायाम करना चाहिए और इस बीमारी को होने से बचाने के लिये तो नियमित रूप से व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।


तनाव से दूर रहें- अपने आप को हर तरह के तनाव से दूर रखें भले ही भावनात्मक तनाव हो या मानसिक तनाव हो, और अगर यह तनाव पहले से हो तो उसे कम करने की कोशिश कीजिये।

फाइब्रोमायल्जिया का इलाज क्या होता है ?What is a treatment for Fibromyalgia?

हालांकि फाइब्रोमायल्जिया के लिए कोई इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन विभिन्न प्रकार की दवाओं से इसके लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इसमें व्यायाम, विश्राम और तनाव कम करने के उपाय भी मदद कर सकते हैं।

फाइब्रोमायल्जिया के इलाज का लक्ष्य होता है दर्द को प्रबंधित करना और लक्षणों को कम करना। यह चिकित्सा और दवाओं के मिश्रण से किया जाता है।

फाइब्रोमायल्जिया के इलाज के लिए प्रत्यक्ष रूप में दवाई उपलब्ध नही हैं, लेकिन इसके लक्षण को कम करने हेतु निम्न लिखित  दवाइयां मददगार हैं –

दर्द निवारक

आपके डॉक्टर एवं केमिस्ट के पास मिलने वाली दर्द निवारक दवाएं, जैसे कि नैप्रोसीन, कॉम्बिफ्लेम, इबुप्रोफेन (Ibuprofen) या एसिटामिनोफेन , टाइलेनॉल (Tylenol) फाइब्रोमायल्जिया में उपयुक्त साबित हो सकते हैं|इसके अलावा गंभीर समस्या होने पर उल्ट्रॉम (Ultrom) भी ली जा सकती हैं।

एंटीडिप्रेसेंट्स-

एंटीडिप्रेसेंट्स फाइब्रोमायल्जिया से जुड़े चिंता या अवसाद का इलाज करने में उपयोग किया जाता है। ये दवाएं नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में भी मदद कर सकती हैं।

दवाओं के अलावा, जागृती और सही जीवनशैली को अपनाना आपको फाइब्रोमायल्जिया के लक्षणों से निपटने में सहायता कर सकती है। जीवनशैली में परिवर्तन और फाइब्रोमायल्जिया के वैकल्पिक उपचार दर्द को कम करते हुए आपको बेहतर महसूस कराते हैं। इन वैकल्पिक उपचारों में से कई तनाव कम करने और दर्द को कम करने पर केंद्रित होते हैं।

फाइब्रोमायल्जिया के विभिन्न प्रकार के उपचार निम्नलिखित हैं -Following are the different types of treatments for fibromyalgia

  • थेरेपी।
  • एक्यूपंक्चर।
  • ध्यान (मेडिटेशन)।
  • योग।
  • नियमित व्यायाम। (और पढ़ें – व्यायाम करने का सही समय)
  • रात में पर्याप्त नींद लेना।
  • मसाज थेरेपी।
  • संतुलित आहार लेना।

जैसे कि हमनें जानकारी पाई हैं, इस विकार का प्रत्यक्ष रूप में कोई इलाज नहीं हैं। यह विकार किसी को भी,किसी भी उम्र में हो सकता हैं। लेकिन हम स्वास्थ्य चिकित्सा को ध्यान में रखते हुए, संतुलित जीवनशैली से इसकी लागत कि संभाव्यता जरूर कमी कर सकते हैं ।

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