Esophageal cancer in hindi

Esophageal cancer in hindi:खाने की नली के कैंसर के बारे में सम्पूर्ण जानकारी

खाने की नली का कैंसर जिसे एसोफैगल कैंसर(Esophageal cancer in hindi) भी कहा जाता है। यदि खाने की नली में बार-बार इंफेक्शन होता है तो खाने की नली का कैंसर (एसोफैगल कैंसर) होने की संभावना बढ़ जाती है। एसोफैगल कैंसर या खाने की नली का कैंसर की अधिकत्तर मामले पुरुषों में देखने को मिलते है। खाने की नली के कैंसर को आम बोल-चाल की भाषा में गले का कैंसर भी कहते है परंतु यह गले के कैंसर से बिल्कुल भिन्न होता है। खाने की नली का कैंसर के अधिकत्तर मामले एशिया और अफ्रीका के देशों में अधिक देखने को मिलते है।

खाने की नली का कैंसर (एसोफैगल कैंसर) एक ऐसा कैंसर होता है, जो कि गले की एक लंबी, खोखली ट्यूब में होता है और यही ट्यूब आपके गले से आपके पेट तक जाती है, जिसे खाने की नली या ग्रासनली (एसोफैगस) कहते हैं। आप आहार के रूप में जो भी खाते हैं एसोफैगस (ग्रासनली) उसे पेट में पाचन के लिए पहुँचाने का कार्य करती है। तम्बाकू, धूम्रपान और अल्कोहल का सेवन अधिक मात्रा में करने के कारण ही एसोफैगल कैंसर होने की सम्भावना बढ़ जाती है। एसोफैगल कैंसर की ज़्यादातर मामले 50 से 70 वर्ष की उम्र के लोगों में देखने को मिलते है परन्तु इन दिनों युवा भी इसकी चपेट में आ रही है इसका एक मात्र कारण है कि वे छोटी उम्र से ही धूम्रपान, तम्बाकू इत्यादि के सेवन शुरू कर देते है।

खाने की नली का कैंसर (एसोफैगल कैंसर) के प्रकार :-Types of esophageal cancer-Esophageal cancer in hindi

खाने की नली का कैंसर के उपचार किस प्रकार का करना है एसोफैगल कैंसर (खाने की नली की कैंसर) की प्रकार पर निर्भर करता है। एसोफैगल कैंसर को कोशिकाओं के प्रकार के अनुसार बाँटा जाता है। खाने की नली के कैंसर (एसोफैगल कैंसर) की प्रकार निम्नलिखित है –

  1. एडेनोकार्सीनोमा :- एडेनोकार्सीनोमा, एसोफैगल कैंसर (खाने की नली का कैंसर) में श्लेष्मा-स्राव ग्रंथियों (म्यूकस सिक्रीटिंग ग्लैंड्स) की कोशिकाओं में प्रारम्भ होता है। एसोफैगल कैंसर का यह प्रकार अक्सर एसोफैगस (ग्रासनली) के निचले भाग में होता है।
  2. स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा :- स्क्वैमस कोशिकाएं सपाट एवं पतली कोशिकाएं होती हैं जो एसोफैगस (ग्रासनली) की सतह को रेखांकित करती हैं। स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा ज्यादातर एसोफैगस (ग्रासनली) के बीच में होता है। एसोफैगल कैंसर के यह प्रकार विश्व में खाने की नली का सबसे प्रचलित कैंसर है।
  3. अन्य प्रकार :- ग्रासनली के कैंसर अर्थात एसोफैगल कैंसर के दुर्लभ रूपों में कोरिओकार्सीनोमा, लिम्फोमा, मेलेनोमा (स्किन कैंसर), सार्कोमा और छोटे सेल के कैंसर इत्यादि शामिल हैं।

खाने की नली का कैंसर (एसोफैगल कैंसर) के चरण :-Stages of esophageal cancer-Esophageal cancer in hindi

खाने की नली का कैंसर एसोफैगल कैंसर के इलाज इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपको किस चरण का एसोफैगल कैंसर है। खाने की नली का कैंसर के पता लगाने के लिए सीटी स्कैन (कम्प्यूटरीकृत टोमोग्राफी स्कैन) तथा पीईटी स्कैन (पॉजिट्रॉन उत्सर्जन टोमोग्राफी स्कैन) इत्यादि के प्रयोग किया जाता है। खाने की नली के कैंसर के चरण निम्नलिखित प्रकार से है –

  1. पहला चरण :- पहले चरण में कैंसर आपकी ग्रासनली (एसोफैगस) की अस्तर कोशिकाओं की सतह की परतों में होता है।
  2. दूसरा चरण :- इस चरण में कैंसर आपकी एसोफैगस (ग्रासनली) की अस्तर की गहरी परतों में पहुँच चुका होता है और आस पास की ग्रंथियों (लिम्फ नोड्स) में फैल सकता है।
  3. तीसरा चरण :- इस चरण में कैंसर आपके एसोफैगस (ग्रासनली) की दीवार और उसके आसपास के ऊतकों (टिशूज) या लिम्फ नोड्स की गहरी परतों में फैल चुका होता है।
  4. चौथा चरण :- एसोफैगल कैंसर की आखिरी चरण में कैंसर आपके शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुका होता है।

खाने की नली का कैंसर (एसोफैगल कैंसर) के कारण :-Causes of esophageal cancer-Esophageal cancer in hindi

एसोफैगल कैंसर उस स्थिति में होता है जब एसोफैगस की कोशिकाओं के डीएनए में कुछ गड़बड़ी होती है। इससे कोशिकाएं अनियंत्रित होकर बढ़ने लगती है और विभाजन की प्रक्रिया करती हैं। फिर यही कोशिकाएं एक जगह एकत्रित होकर जमने लगती हैं, और ट्यूमर बना लेती हैं। यही ट्यूमर शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है।

खाने की नली का कैंसर (एसोफैगल कैंसर) के कारणों अभी स्पष्ट प्रकार से ज्ञात नहीं है परंतु कुछ ऐसे कारक है जो कि जिनके कारण से खाने की नली का कैंसर (एसोफैगल कैंसर) होने की संभावना बढ़ जाती है –

  • एल्कोहल का सेवन अधिक मात्रा में करना
  • धूम्रपान करना
  • बहुत गर्म तरल पदार्थ का पी लेना
  • एसिड रिफ्लक्स होना
  • फलो और सब्जियों का सेवन कम करना
  • वजन अधिक होना
  • गैस्ट्रोसोफेजियल रीफ्लक्स बीमारी 
  • एसोफैगस (ग्रासनली) की कोशिकाओं में अवांछित परिवर्तन होना
  • सीने या पेट की ऊपरी हिस्से में रेडिएशन उपचार कारवाना इत्यादि।

खाने की नली का कैंसर (एसोफैगल कैंसर) के लक्षण :-Symptoms of esophageal cancer-Esophageal cancer in hindi

खाने की नली का कैंसर की लक्षण कुछ निम्न प्रकार से है –

  • निगलने में परेशानी
  • अकारण वजन का घटना 
  • छाती में दर्द होना, दबाव महसूस होना या जलन होना 
  • अपच की समस्या होना
  • खांसी अधिक आना या गला बैठना 
  • खट्टी डकार आना
  • खून की उल्टिया होना इत्यादि।

खाने की नली का कैंसर (एसोफैगल कैंसर) का इलाज :-Treatment

एसोफैगल कैंसर का उपचार इसके प्रकार, चरण तथा आपकी मेडिकल हिस्ट्री को ध्यान में रखकर किया जाएगा। एसोफैगल कैंसर के उपचार निम्न प्रकार से किये जा सकते है –

  • सर्जरी :- कैंसर को हटाने के लिए केवल सर्जरी अथवा सर्जरी के साथ अन्य उपचार भी किये जा सकते है। खाने की नली के कैंसर के इलाज के लिए सर्जरी के विकल्प कुछ इस प्रकार से हैं –
  1. बहुत छोटे ट्यूमर को हटाने के लिए सर्जरी की जा सकती है।
  2. एसोफैगस के एक हिस्से को हटाने के लिए सर्जरी की जा सकती है।
  3. एसोफैगस और पेट के ऊपरी हिस्से को हटाने के लिए सर्जरी की जा सकती है।
  • कीमोथेरपी :- कीमोथेरेपी एक ऐसा उपचार है जिसमें कैंसर की कोशिकाओं को मारने के लिए रसायनिक पदार्थो का उपयोग किया जाता है। साधारणतः कीमोथेरेपी की दवाओं का उपयोग एसोफैगल कैंसर से ग्रसित मरीजों में सर्जरी से पहले अथवा सर्जरी के बाद किया जाता है। कीमोथेरेपी विकिरण चिकित्सा (रेडिएशन) के साथ भी की सकती है। जिन मरीजों का कैंसर ग्रासनली से आगे फैल गया है, उन मरीजों को एसोफैगल कैंसर के लक्षणों से बचने के लिए कीमोथेरेपी का उपयोग अकेले भी किया जा सकता है।
  • विकिरण उपचार :- रेडिएशन थेरेपी में कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए उच्च शक्ति वाली एक्स किरणों का उपयोग किया जाता है। विकिरण एक मशीन से आता है और इस किरण का लक्ष्य कैंसर वाली जगह होती है। विकिरण उपचार का उपयोग सर्जरी से पहले अथवा सर्जरी बाद किया जा सकता है। रेडिएशन थेरेपी का उपयोग बढ़े हुए एसोफैगल कैंसर की जटिलताओं से छुटकारा पाने के लिए भी किया जा सकता है, जैसे कि जब ट्यूमर आपके पेट में भोजन इत्यादि को जाने से रोकने लगता है तब रेडिएशन थेरेपी का प्रयोग किया जाता है।

खाने की नली के कैंसर (एसोफैगल कैंसर) से बचाव :-Protection against cancer

खाने की नली के कैंसर(Esophageal cancer in hindi) के खतरे को कम करने के लिए आप निम्न बचाव कर सकते हैं –

  • धूम्रपान छोड़ना :- यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो इसे छोड़ना सबसे बेहतर उपाय है यदि यह आपसे नहीं छूट रहा है तो अपने डॉक्टर से इसे छोड़ने के बातें में सलाह लें। धूम्रपान छोड़ने में मदद के लिए दवाएं और परामर्शदाता उपलब्ध हैं। 
  • शराब पीना कम या बंद करें :- शराब का सेवन यदि सिमित मात्रा में किया जाए तो ये किसी दवा से कम नहीं है परन्तु जब इसका सेवन अत्यधिक मात्रा में किया जाता है तो ये बहुत ही नुक्सानदेह साबित हो सकता है। यदि आप पुरुष हैं तो अपने आपको सिर्फ दो ड्रिंक्स तक सीमित करें और यदि आप महिला हैं तो खुद को सिर्फ एक ड्रिंक तक सीमित रखें।
  • अधिक फल और सब्जियां खाएं :- हरी ताजी सब्जी और ताजे फलों का सेवन यदि प्रतिदिन किया जाए तो ये स्वस्थ्य के लिए बहुत ही अधिक लभ्दय होता है अतः अपने आहार में विभिन्न प्रकार के फल तथा सब्जियों को शामिल करें। 

कैंसर के बारे में कुछ और महत्वपूर्ण जानकारिया

मेरा नाम रूचि सिंह चौहान है ‌‌‌मुझे लिखना बहुत ज्यादा अच्छा लगता है । मैं लिखने के लिए बहुत पागल हूं ।और लिखती ही रहती हूं । क्योकि मुझे लिखने के अलावा कुछ भी अच्छा नहीं लगता है में बिना किसी बोरियत को महसूस करे लिखते रहती हूँ । मैं 10+ साल से लिखने की फिल्ड मे हूं ।‌‌‌आप मुझसे निम्न ई-मेल पर संपर्क कर सकते हैं। vedupchar01@gmail.com
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